हरिव्दार से आए अखंड दीप शक्ति कलश का पुष्पवर्षा से स्वागत
-विभिन्न गांवों में भ्रमण, धमधा में हुआ दीपयज्ञ
धमधा 5 जनवरी 2024।शांतिकुंज हरिद्वार से आए अखण्ड दीप शक्ति कलश का धमधा में भव्य स्वागत हुआ। अलग अलग गांवों में लोगों ने आरती उतारी और जगह जगह पुष्पवर्षा करके स्वागत किया गया। रात में धमधा के साहू पारा में दीपयज्ञ से गायत्री माता की आराधना की गई।
सगायत्रीतीर्थ में पं. श्रीराम शर्मा व्दारा जलाये गए अखंड दीप को सौ वर्ष होने के अवसर पर शक्ति कलश रथयात्रा धमधा पहुंची।
रथयात्रा लिमतरा से निकलकर अहिवारा, नंदनीखुंदनी, पथरिया, बसनी, दानीकोकड़ी, सिल्ली, परसुली, कन्हारपुरी, करेली, परोड़ा होते हुए धमधा गायत्री मंदिर पहुंची। वहां से नगर के विभिन्न मंदिर हनुमान मंदिर, महामाया मंदिर, शीतला मंदिर होते हुए नगर के सभी मोहल्लों में गई। लोगों ने धूप दीप से आरती की। इसके बाद साहू पारा में भजन कीर्तन के साथ गायत्री माता की आरती उतारी गई।
इसमें गायत्री परिवार के ब्लाक अध्यक्ष वीरेंद्र देवांगन, रामलाल यादव, गोविन्द पटेल, सुनील गुप्ता, जनपद सदस्य ईश्वरी निर्मलकर, बीरेंद्र सोनी, सुरेंद्र सोनी पथरिया, भुवनेश्वर धीवर, राजू कहार, सजल गुप्ता, रीना खोमन पटेल परसुली, रमेश कश्यप बसनी, विवेक कश्यप मेड़ेसरा, श्रेया देवांगन सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। यात्रा का स्वागत गिरवर पटेल परसुली, टुमन वर्मा सिल्ली, धमधा में मंजू धीवर का सहयोग रहा।
कल 6 जनवरी को यात्रा बरहापुर प्रातः 10.00 बजे, ठेलका चौक प्रातः 11.00 बजे, पेण्ड्री कुटहा दोप. 12.00 बजे, कुटहा दोप. 1.00 बजे, बिरझापुर दोप. 02.00 बजे, डगनिया अपरान्ह 03.00 बजे, सिरनाभाठा सायं 4.00 बजे, धमधा गंडई चौक - सायं 4.30 बजे से दुर्ग के लिए प्रस्थान करेगी।
देवांगन ने बताया कि गायत्री परिवार द्वारा अखंड दीप जन्म शताब्दी वर्ष 2026 में मनाया जाएगा। इसके उपलक्ष्य में 2025 में पूरे साल विभिन्न आयोजन किया जा रहा है। विभिन्न स्थानों पर मातृशक्ति अखंडदीप जन्म शताब्दी श्रद्धा संवर्धन यात्रा इस शक्ति कलश के रूप में निकाली गई है।
देवांगन ने बताया कि 2026 तक चार महासंयोग एक साथ होने जा रहा है। पहला पूज्य गुरूदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य व्दारा प्रज्ज्वलित अखण्ड दीप 18 जनवरी 1926 से निरंतर जल रहा है उनका शताब्दी वर्ष 2026 में होगा। दूसरा वन्दनीय माता जी भगवती देवी शर्मा का अवतरण दिवस 20 सितम्बर 1926, को होगा, जिसे जन्म शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। तीसरा अति मानस का अवतरण और चौथा गुरुदेव की साधना की शुरुआत चारों का शताब्दी वर्ष है 1926। जो की 2026 में एक सौ वर्ष पूरे होने वाले हैं । इसमें चार मुख्य काम होंगे, जिसमें गृह-गृह गायत्री यज्ञ,घर-घर देव स्थापना, आत्म परिष्कार की साधना व्यक्ति निर्माण और अपने जैसा कम से कम पांच लोगों को गायत्री मिशन के साथ जोड़ना लक्ष्य होगा।


