एक ज़मीन… कई खरीदार! पावर ऑफ अटॉर्नी का खेल या सोची-समझी ठगी? अरसी में 3 लाख का सौदा बना आपराधिक मामला
हेमंत पाल /दुर्ग जिले के ग्राम अरसी की शांत फिज़ा इन दिनों ज़मीन के एक सौदे को लेकर गरम है। मामला सिर्फ 32 डिसमिल (0.32 हेक्टेयर) कृषि भूमि का है, लेकिन कहानी ऐसी कि सुनकर कोई भी चौंक जाए। आरोप है तीन लाख रुपये लेने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं की गई, उल्टा वही जमीन किसी और के नाम कर दी गई
भिलाई निवासी दीपक मदान ने शिकायत में बताया कि सितंबर 2024 में ग्राम अरसी निवासी दीपक देशलहरे से खसरा नंबर 1051 और 1086 की कुल 0.32 हेक्टेयर जमीन का सौदा 3 लाख रुपये में तय हुआ।
रकम भी पूरी अदा की गई
50 हजार रुपये ऑनलाइन1 लाख रुपये नगद1.50 लाख रुपये चेक के माध्यम से भुगतान के बाद आरोपी ने “कागज़ी त्रुटि” का हवाला देते हुए समय मांगा और पावर ऑफ अटॉर्नी देने की बात कही। भरोसा कायम रहा… इंतजार चलता रहा… लेकिन रजिस्ट्री नहीं हुई।
जब शिकायतकर्ता खुद रजिस्ट्री कराने पहुंचे तो पता चला कि जिस जमीन का सौदा हुआ था, उसकी पावर ऑफ अटॉर्नी किसी अन्य व्यक्ति को देकर रजिस्ट्री कराई जा चुकी है।
तहसील कार्यालय में और भी चौंकाने वाली जानकारी मिली बताया गया कि उसी जमीन को लेकर कई लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है। यानी शक की सुई इस ओर भी इशारा कर रही है कि एक ही जमीन के लिए कई लोगों को पावर ऑफ अटॉर्नी दी गई।
21 मार्च 2026 को चौकी लिटिया सेमरिया में रिपोर्ट दर्ज की गई। मामले को थाना बोरी भेजा गया, जहां भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध क्रमांक 00/2026 पंजीबद्ध किया गया है। जांच की जिम्मेदारी हेड कांस्टेबल योगेश पचौरी को सौंपी गई है।
क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी है, या जमीन के नाम पर बड़ा खेल?
क्या पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग कर सुनियोजित तरीके से रकम वसूली गई?
तहसील में दर्ज आपत्तियों के पीछे कितने और लोग हैं?
पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, चेक क्लियरेंस, पावर ऑफ अटॉर्नी दस्तावेज और नामांतरण की प्रक्रिया की जांच करेगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो मामला साधारण विवाद से आगे बढ़कर आपराधिक साजिश की शक्ल ले सकता है।
फिलहाल, अरसी की इस जमीन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिस खेत में फसल उगनी थी, वहां अब कानूनी पेच-पेंच की फसल लहलहा रही है।


